
पौड़ी 21 अगस्त
गजेंद्र सिंह
उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री घोषणा के क्रम में जनपद पौड़ी में सीता सर्किट के समग्र विकास की कार्यवाही तेज कर दी गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने संबंधित विभागों, कार्यदायी संस्था, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं हितधारकों के साथ बैठक ली। बैठक में सीता सर्किट से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के सुनियोजित विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में सितोनस्यूं पट्टी स्थित विदाकुटी मंदिर, फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर, वाल्मीकि मंदिर तथा देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर सहित प्रमुख स्थलों के विकास की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। सर्किट के प्रथम चरण के विकास कार्यों के लिए 78 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
बैठक में उपस्थित स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि सीता सर्किट का विकास पौड़ी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
प्रथम चरण में प्रमुख स्थलों पर रामायण की कथाओं एवं संबंधित धार्मिक-ऐतिहासिक प्रसंगों पर आधारित म्यूरल एवं वॉल म्यूरल, स्कल्पचर, दिशा-सूचक साइनेज, वाटर एटीएम सहित आवश्यक यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंदिर परिसरों में आवश्यक मरम्मत, रंग-रोगन तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के कार्य भी किए जाएंगे।
देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में प्रथम चरण में साइनेज की व्यवस्था की जाएगी, जबकि पार्किंग का विकास द्वितीय चरण में किया जाएगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों से जुड़ी पौराणिक एवं ऐतिहासिक कथाओं को प्रमाणिक एवं आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इन स्थलों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी मिल सके।
बैठक में विभिन्न स्थलों के साइट प्लान प्रस्तुत किए गए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मंदिर परिसरों का विकास प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के अनुरूप किया जाए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक निर्माण और अत्यधिक सजावटी कार्यों से बचते हुए श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी एवं आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।
जिलाधिकारी ने मंदिरों की वास्तविक तस्वीरों के आधार पर डिजाइन तैयार करने, परिक्रमा पथ की व्यवस्था करने तथा मंदिर प्रांगण को पर्याप्त रूप से खुला, स्वच्छ और व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सोलर पैनलों को भी परिसर की सुंदरता को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित एवं एकरूप तरीके से स्थापित करने को कहा।
जिलाधिकारी ने साइट प्लान में अपेक्षित वॉक-थ्रू डिजाइन उपलब्ध न होने पर नाराज़गी जताते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण विकास के लिए एक से अधिक आर्किटेक्ट से थ्री-डी डिजाइन एवं वॉक-थ्रू तैयार करवाए जाएं। इनमें से बेहतर डिजाइन का चयन कर उसी के अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाए।
बैठक में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर के विकास से संबंधित भूमि मामलों की भी समीक्षा की गई। भूसमाधि स्थल की भूमि दान करने पर सहमति बनने की जानकारी दी गई, जबकि धर्मशाला के लिए भूमि संबंधी सहमति की कार्यवाही जारी है। मंदिर के बाईं ओर म्यूरल के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है। साथ ही जिलाधिकारी ने कोटसाड़ा स्थित वाल्मीकि मंदिर के साइट प्लान की समीक्षा के दौरान भी संयुक्त मजिस्ट्रेट को मौके पर जाकर भूमि की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक अनापत्ति संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने संयुक्त मजिस्ट्रेट को सभी संबंधित मंदिरों की भूमि का सर्वे कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को मानचित्र लेकर गांव में मौके पर जाकर भूमि की स्थिति का सत्यापन करने तथा साइट प्लान में इसे स्पष्ट रूप से दर्शाते हुए सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
जिलाधिकारी ने कहा कि द्वितीय चरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसमें फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर तक संपर्क मार्ग का निर्माण, सड़क के लिए आवश्यक मुआवजा, देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में पार्किंग, सीता माता मंदिर में धर्मशाला तथा सभी मंदिर परिसरों के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता एवं सहमति सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं को शामिल किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि द्वितीय चरण के प्रस्ताव से जुड़े भूमि संबंधी मामलों में आवश्यक सहमति, मुआवजा आकलन आदि समयबद्ध तरीके से प्राप्त की जाए, ताकि विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में किसी प्रकार की बाधा न आए।
बैठक में संबंधित गांवों के ग्राम प्रधानों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उनके सुझाव और फीडबैक भी लिए गए।
बैठक में जिला पर्यटन विकास अधिकारी कमल किशोर जोशी, एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. सर्वेश उनियाल, जीएमवीएन से अरुण चमोली सहित संबंधित अधिकारी, फलस्वाड़ी, कोटसाड़ा, देवल आदि गांवों के ग्राम प्रधान एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
