
ऋषिकेश 14 अप्रैल
गजेंद्र सिंह
बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर परमार्थ निकेतन में उन्हें भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। आज का दिन बाबा साहेब के आदर्शों और मूल्यों का उत्सव है, जिनके आधार पर आज का आधुनिक भारत खड़ा है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने बाबा साहेब अम्बेडकर जी को याद करते हुये कहा कि एक व्यक्ति, जिसकी शुरुआत अत्यंत विषम परिस्थितियों से हुई, वह शिक्षा, चेतना और अदम्य साहस के बल पर एक समतामूलक, न्यायप्रिय राष्ट्र की आधारशिला रखने में सक्षम हुआ।
बाबासाहेब अम्बेडकर केवल भारत के संविधान निर्माता ही नहीं थे, वे एक महान विचारक, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, और मानवतावादी भी थे। उनका संपूर्ण जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी महान उद्देश्यों की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि भीतर आत्मबल और समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो सब कुछ सम्भव है। बाबा साहेब ने दिखा दिया कि शिक्षा ही मुक्ति का माध्यम और मार्ग है। शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है।
स्वामी जी ने कहा कि यदि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को शिक्षा मिल जाए, तो वह अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर स्वयं अपने लिए परिवर्तन का वाहक बन सकता है और समाज में समानता और न्याय की स्थापना का संवाहक बन सकता है।
भारतीय संविधान में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता को मूलभूत सिद्धांतों के रूप में शामिल करने वाले बाबासाहेब ने यह सुनिश्चित किया कि हर नागरिक को बिना भेदभाव के बराबरी का अधिकार मिले। कोई भी राष्ट्र तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके नागरिक जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर विभाजित हों इसलिये जरूरी है कि हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार प्राप्त हो।
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान की सभी समस्याओं का समाधान संविधान में निहित है, संविधान ही है समाधान।
भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जीवंत सामाजिक संकल्प है जो समरसता, सहिष्णुता और मानव गरिमा की स्थापना करता है। बाबासाहेब ने जो नींव रखी, उसे मजबूत करना आज हम सभी की जिम्मेदारी है।
स्वामी जी ने कहा कि बाबासाहेब का जीवन आज के युवाओं के लिए एक आदर्श है। उन्होंने दिखाया कि ज्ञान, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी बाधा पार की जा सकती है।
आज जब युवा नई तकनीकों, नई सोच और नई ऊर्जा के साथ राष्ट्रनिर्माण में भागीदार बन रहे हैं, तब बाबासाहेब के विचार उन्हें नैतिक और सामाजिक दिशा प्रदान करते हैं। अम्बेडकर जयंती केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि एक संकल्प लेने का दिन है। संकल्प इस बात का कि हम भेदभाव और अन्याय को जड़ से मिटाकर एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो सबके लिए समभाव और सम्मान का घर बने।
