गैरसैंण 27 अक्टूबर
गजेंद्र सिंह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत चमोली जनपद के गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रामगंगा नदी पर बांध निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना को महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस परियोजना के लिए कुल 122.6891 करोड़ रुपये की लागत पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रथम किश्त के रूप में 2.454 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
यह परियोजना गैरसैंण नगर तथा उससे लगी आबादी की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री घोषणा के अनुरूप प्रस्तावित _Construction of Dam across Ramganga River for drinking water supply of Gairsain town and adjoining population in District Chamoli_ परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि की व्यवस्था की गई है। शासन स्तर से जारी आदेश के अनुसार परियोजना की कुल लागत 12,268.91 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें प्रथम चरण के लिए पूर्व में स्वीकृत 24.76 लाख रुपये की धनराशि भी सम्मिलित है।
प्रथम किश्त के रूप में कुल स्वीकृत लागत के लगभग 2 प्रतिशत के बराबर 2.454 करोड़ रुपये की धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम आहरित कर उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। यह धनराशि परियोजना के कार्यों को प्रारंभ करने के लिए टोकन धनराशि के रूप में प्रदान की गई है।
शासनादेश के अनुसार परियोजना के लिए स्वीकृत प्रारंभिक धनराशि का समायोजन भारत सरकार से Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment for 2026-27 (SASCI) के अंतर्गत धनराशि प्राप्त होने पर राज्य सेक्टर से किया जाएगा।
राज्य सरकार ने परियोजना के क्रियान्वयन में निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी उपयुक्तता और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी है। बांध एवं बैराज के निर्माण से संबंधित संरचनात्मक डिजाइन और ड्राइंग किसी मान्यता प्राप्त संस्था से जांच एवं सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप से अपनाई जाएगी। सिंचाई विभाग को बांध के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही निर्माण कार्य का तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है।
परियोजना के निर्माण के दौरान जल स्रोत में न्यूनतम जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा बांध निर्माण के कारण डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रभावित होने वाले गांवों को निर्बाध रूप से जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो, ताकि विकास का लाभ आमजन तक पहुंचे।
