
ऋषिकेश 10 नवम्बर
गजेंद्र सिंह
प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरूजी अवधूत स्वामी समर्पणानंद सरस्वती महाराज की आध्यात्मिक यात्रा का हुआ समापन। यह धार्मिक यात्रा 1 अगस्त, 2025 को शुरू हुई थी, जिसमें गुरूजी ने विभिन्न देशों का दौरा किया और योग, वेदांत, क्रिया योग, और कुंडलिनी तंत्र पर अपने ज्ञान को साझा किया।
इस यात्रा के दौरान, गुरूजी ने ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको सिटी, अमेरिका, लातविया, बेल्जियम, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, और स्कॉटलैंड का दौरा किया, और सच्चे योग जिज्ञासुओं को उनके आध्यात्मिक मार्ग पर मार्गदर्शन किया। उनकी शिक्षाओं में आंतरिक शांति, आत्म-ज्ञान, और आध्यात्मिक विकास पर जोर दिया गया, जिसमें योग, वेदांत, बाबाजी क्रिया योग, कुंडलिनी तंत्र, मंत्र, और आध्यात्मिक नाम दीक्षा शामिल हैं।
गुरूजी ने अपनी यात्रा के दौरान कई लोगों को वेदिक कर्म सन्यास, वनप्रस्थ सन्यास, और योगिक तांत्रिक सन्यास दीक्षा भी प्रदान की। उनकी शिक्षाओं ने लोगों को आंतरिक शांति, आत्म-ज्ञान, और आध्यात्मिक विकास की दिशा में प्रेरित किया है।
गुरूजी की यह यात्रा भारत को विश्व गुरु बनाने में अहम है।
गुरूजी अवधूत स्वामी समर्पणानंद सरस्वती तपोवन, ऋषिकेश, उत्तराखंड, हिमालय में रहते हैं, जहाँ से वे विश्वभर में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते हैं। गुरूजी ने 58 देशों का दौरा किया है, जिसमें यूरोप, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका, एशिया, मध्य पूर्व, और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
