
तपोवन 17 अप्रैल
गजेंद्र सिंह
स्वामी समर्पणानंद आश्रम तपोवन में चल रहे (योग शिक्षक प्रशिक्षण) का समापन योग, सनातन धर्म, और दर्शनशास्त्र के ज्ञान के साथ हुआ। इस मौके पर देश-विदेश से आए हुए योग जिज्ञासुओं ने सनातन धर्म का ज्ञान लिया और योग के ज्ञान को विश्व भर में फैलाने का प्रण लिया।
इस अवसर पर आश्रम के अध्यक्ष स्वामी समर्पणानंद सरस्वती ने सभी योग जिज्ञासुओं को योग सनातन धर्म और दर्शनशास्त्र के विभिन्न शाखाओं के बारे में बताया उन्होंने कहा कि भारत केवल योग की जन्मभूमि ही नहीं है बल्कि यह एक ऐसा देश है जहां सभी धर्म के लोग प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान के साथ रहते हैं यह एक पवित्र भूमि है जहां नदियां, वनों महासागरों, हिमालय जैसे दिव्य पर्वतों से सुशोभित है और ज्ञान मार्ग के लिए भारत प्राचीनकाल से ही सर्वोपरि रहा है भारत में अनेक ऋषि मुनियों ने तपस्या के माध्यम से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति पाई है।
साथ ही उन्होंने योग साधकों को पंचाग्नि साधना के बारे में भी बताया जिस साधना में वर्तमान में गुरुजी लीन है और इस साधना की पूर्णाहुति 16 मई को होगी।
