पौड़ी 15 अक्टूबर
गजेंद्र सिंह
मेहनत और लगन के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ा जा सकता है। पौड़ी गढ़वाल के ग्राम धुंगसरी निवासी 37 वर्षीय गोविंद जोशी ने डेयरी फार्मिंग को आजीविका का आधार बनाकर इसे साबित किया है। वर्ष 2017 से डेयरी व्यवसाय में जुटे गोविंद आज इस कारोबार से प्रतिमाह करीब 60 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
गोविंद जोशी ने बताया कि उन्हें पशुपालन के प्रति रुचि थी। इसी रुचि को उन्होंने स्वरोजगार में बदलने का निर्णय लिया और वर्ष 2017 में डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। निरंतर मेहनत और अनुभव के साथ उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाया। व्यवसाय को विस्तार देने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लिया, जिसके तहत उन्हें 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इससे डेयरी व्यवसाय को मजबूती मिली और आय के अवसर बढ़े।
गोविंद की इस सफलता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को भी सामने लाती है। पशुपालन और डेयरी जैसे व्यवसायों के माध्यम से युवा अपने गांव में रहकर आजीविका के साधन विकसित कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है।
प्रदेश सरकार की ओर से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पशुपालन जैसे व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के निर्देशन में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि पशुपालन और डेयरी फार्मिंग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक अच्छा माध्यम है। पशुपालक विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर अपने व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं और आय के बेहतर अवसर विकसित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने और विभागीय योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की।
